Connect with us

धर्म संसार

कृष्ण की बहन योगमाया का अवतार है करौली की कैला माता

Published

on

मालीराम वर्मा

राजस्थान के करौली में स्थित कैला देवी की मान्यता उत्तर भारत में प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में है। कैला मईया का मेला चेत्र माह में नवरात्रों में आयोजित होता है। कैला देवी के मेले के दौरान लाखों भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगाते है।

कैला देवी का मंदिर राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। कैला देवी को मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। करौली जिले में स्थित माता के प्राचीन मंदिर में दो मूर्तियां हैं। इनमें एक मूर्ति कैला देवी की और दूसरी चामुंडा माता की है। लाल पत्थरों से बने इस मंदिर का निर्माण 1600 ईस्वी में राजा भोमपाल सिंह ने करवाया था।

कैला देवी का मुंह है तिरछा, जानिए क्यों

यहां चांदी की चौकी पर दो मूर्तियां विराजमान है। इनमें एक मूर्ति कैला देवी की और उनका मुंह तिरछा है। दरअसल, माता का मुंह तिरछा होने के पीछे एक कहानी बताई जाती है। कहा जाता है कि उनका मुंह एक भक्त की वजह से टेड़ा हो गया। बहुत समय पहले उनका एक व्यक्ति नियमित रूप से माता की पूजा करता था। एक दिन वह भक्त माता से यह बोलकर गया कि वे थोड़ी देर में वापस लौटेगा। तब से मां का मुंह उस दिशा में है जिस दिशा में वह भक्त गया था। वह भक्त आज तक नहीं लौटा।

इस मंदिर की स्थापना के संबंध में कहा जाता है कि यह मूर्तियां पहले नगरकोट में स्थापित थी। एक समय जब अधार्मिक लोगों द्वारा मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, तब तोड़फोड़ से आशंकित पुजारी योगिराज इस मूर्ति को मुकुंददास खींची के यहां लेकर आ रहे थे। इस दौरान रात हो गई। वे पहाड़ी की तहलटी में स्थित केदारगिरि बाबा की गुफा के पास रुक गए। यहां विश्राम के लिए उन्होंने बैलगाड़ी से मूर्तियां नीचे उतार दी और खुद बाबा से मिलने गुफा में चले गए।

अगले दिन जब सुबह योगिराज आगे की यात्रा पर रवाना होने के लिए मूर्ति को उठाई तो वह हिली नहीं। अंत में इसे माता की इच्छा मानते हुए उन्होंने मूर्ति वहीं पर स्थापित करने का तय किया और केदारगिरी बाबा को उसकी जिम्मेदारी सौंप दी। वर्तमान मंदिर उसी स्थान पर बना हुआ है।

भगवान कृष्ण की बहन है कैला देवी

राजस्थान के करौली में स्थित कैला देवी

कैला देवी के बारे में कहा जाता है कि वह भगवान श्रीकृष्ण की बहन योगमाया है। एक मान्यता के अनुसार, जिस समय वासुदेव और देवकी के आठवीं संतान के रूप में श्री कृष्ण ने जन्म दिया लिया था उसी समय नंद और यशोदा के घर एक कन्या ने योगमाया के रूप में जन्म लिया था।

बाद में योगमाया को कंस के कारागर में और श्रीकृष्ण को नंदगांव पहुंचा दिया। कंस ने योगमाया को वासुदेव और देवकी की आठवीं संतान मानकर मारना चाहा तो वह उसके हाथ से छूट गई और योग शक्ति बन गई।
यही योगमाया कैला देवी है। प्राचीन काल में इस इलाके में नरकासुर नामक एक राक्षस का आंतक था। उसके आतंक से मुक्ति के लिए निवासियों द्वारा माता दुर्गा की पूजा की गई और माता दुर्गा ने कैला देवी का अवतार लेकर नरकासुर राक्षस का वध किया। इस कारण कैलादेवी का दुर्गा का अवतार माना जाता है।

Continue Reading
Comments

Bikaner

बीकानेर के करणी माता मंदिर को कहते है चूहों का मंदिर, नवरात्रों में लगता है मेला

Published

on

यहां 20 हजार से ज्यादा चूहे है।

करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक में है। नवरात्र में यहां ​मेला आयोजित होता है। विश्व में यह एक अनूठा मंदिर है जहां चूहों की पूजा होती है। यहां 20 हजार से ज्यादा चूहे है।

चूहे भगवान गणेश के वाहन है। लेकिन राजस्थान के इस प्रसिद्ध मंदिर में में चूहे देवी करणी के पुत्रों के रुप में पूजते है। करणी माता को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। चारण समेत कई जातियों की यह कुलदेवी है। आसोज और चैत्र नवरात्रों में यहां मेला आयोजित होता है। इसमें राजस्थान और आसपास के राज्यों से माता के भक्त आते है। करणी माता का मंदिर बीकानेर से करीब 30 किमी दूर देशनोक में स्थित है। यहां करणी माता के दो मंदिर है।

एक मंदिर देशनोक में है और दूसरा वहां से करीब 1 किमी. पर स्थित है। दोनों ही मंदिरों की मान्यता है, लेकिन चूहों का जमघट केवल देशनोक स्थित मंदिर में नजर आता हैं। यहां स्थित यह है कि कब चूहा आपके पैर पर से गुजर जाए अंदाजा नहीं लगा सकते। इसलिए यहां बड़ी सावधानी से चलना पड़ता है। पैर के नीचे चूहे का आना अशुभ माना जाता है।

करणी माता की आरती

करणी माता मंदिर में सुबह और शाम को आरती के वक्त देखने लायक दृश्य होता है। घंटे-घडियाल की आवाज सुनकर चूहे बाहर निकल आते है। कई चूहे आपको यहां झूमते भी नजर आ जाएंगे। वैसे दिनभर इनकी यहां धमाचौकड़ी जारी रहती है। यहां पर कुछ सफेद चूहे भी है जिनका दिखाई देना बहुत शुभ माना जाता है। यहां चूहों को काबा कहते है। चूहों का झूठा प्रसाद खाया भी जाता है। आश्चर्य की बात है कि यहां इतने चूहे हैं लेकिन कभी कोई बीमारी नहीं फैली। करणी माता के भक्त इसे मां का चमत्कार मानते है। चूहों का यहां दूध पिलाया जाता है। उनके प्रसाद के लिए चांदी की परात रखी हुई है।

बीकानेर और जोधपुर राज्य की स्थापना

श्रद्धालुओं का मानना है कि करणी देवी साक्षात मां जगदम्बा की अवतार थीं। जिस स्थान पर मंदिर है वहां लगभग साढ़े छह सौ वर्ष एक गुफा में करणी अपने इष्ट देव की पूजा करती थी। यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है। करणी माता के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी इच्छानुसार उनकी मूर्ति की स्थापना यहां की गई। करणी माता के आशीर्वाद से ही बीकानेर और जोधपुर राज्य की स्थापना हुई थी।

करणी माता का मंदिर देशनोक रेलवे स्टेशन से चंद कदम की दूरी पर स्थित है। देशनोक स्टेशन जयपुर-बीकानेर लाइन पर स्थित है और यह स्टेशन कई शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां बस स्टैंड भी है। इसके अतिरिक्त निजी साधन भी बीकानेर के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते है। देशनोक में धर्मशालाएं और होटल भी है। अपने बजट के हिसाब से इनमें आप रूम ले सकते है।

Continue Reading

NEWS

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर ‘सुप्रीम’ फैसला, 800 साल पुरानी प्रथा खत्म

Published

on

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर 800 साल से चली आ रही पुरानी परंपरा खत्म हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दे दी। पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। यह प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। इस व्यवस्था को एक याचिका में चुनौती दी गई थी।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने शुक्रवार को इस याचिका पर फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि सभी अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। लैंगिक आधार पर श्रद्धालुओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता। फैसले में कहा गया है कि 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकने की प्रथा संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।

इसलिए चली आ रही थी यह परंपरा

केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग की स्थापना की गई थी। इसके तहत अय्यप्पा स्वामी का सबरीमाला मंदिर बना। इसमें सभी पंथ के लोग आ सकते थे। ये मंदिर 800 साल पुराना माना जाता है। अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है। इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।

Continue Reading

EVENT

मेले में चेन चोरी तो लोगों ने 1.51 लाख रु.जुटाकर दिए, फिर बनी ‘मिसाल’

Published

on

chaukadi news

खेजड़ली और बिश्नोई समाज एक बार फिर मिसाल बन गया है। प्रसिद्ध खेजड़जी मेले में घूमने आई महिला की सोने की चेन चोरी हो गई। मेले की साख के खातिर बिश्नाई समाज ने एकजुटता दिखाई।

यह घटना राजस्थान के प्रसिद्ध खेजड़ली मेले की है। जोधपुर के पास आयोजित इस पर्यावरण मेले में महिलाएं सोने के गहने पहनकर आती है। मेले का इतिहास रहा है कि यहां कभी किसी महिला के गहने चोरी नहीं हुए। इस कारण वे बेखौफ होकर यहां आती है। दैनिक भास्कर की एक खबर के मुताबिक, यहां घूमने आई पारसी देवी की 4 तोले सोने की चेन चोरी हो गई।

बात आयोजकों तक पहुंची। गांव के मेले की साख का सवाल था, तो वहां मौजूद हर शख्स ने थोड़ा-थोड़ा पैसा दिया। बिश्नोई समाज ने इंतजाम संभाला और हाथों-हाथ 1.51 लाख रुपए इकट्‌ठा हो गए। पैसा महिला को दिया गया, लेकिन महिला और उनके पति ने इसमें अपनी तरफ से 5 हजार रुपए जोड़कर पैसे वापस कर दिए। महिला ने इस पैसे से वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा, ताकि फिर यहां चोरी नहीं हो। मंदिर ट्रस्ट ने इसके लिए काम भी शुरू कर दिया है।

खेजड़ली मेला

खेजड़ली का ये मेला उन 363 लोगों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने 1703 में पेड़ों की बचाने की जिद ठानकर जान दे दी थी। मेला हर साल मनाया जाता है। मेले के माहौल पर लोगों का ऐसा भरोसा है कि विश्नोई समाज की महिलाएं सिर से पैर तक गहनों से लदकर मेले में पहुंचती हैं। आज तक मेले से किसी की पिन तक चोरी नहीं हुई थी। ये पहला मौका था। उसमें भी सोने की चेन चोरी हो गई। यह हमारे लिए एक चेतावनी की तरह था। तभी फौरन कदम उठाया।

Continue Reading
Advertisement
Crime4 hours ago

कोटा की मॉडल का शव बैग में मिला, मुंबई में दोस्त अरेस्ट

POLITICAL1 week ago

विधानसभा चुनाव : फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, यूट्यूब पर POST करने से पहले जान लें ये

Election Commission of India's Model Code of Conduct 1
NEWS1 week ago

विधानसभा चुनाव : सरकारी कर्मचारी-अधिकारी रखे ये ध्यान, नही तो पड़ेगा भारी

NEWS1 week ago

PM की सभा के कारण बदला चुनाव कार्यक्रम घोषणा का टाइम, कांग्रेस का गंभीर आरोप

NEWS1 week ago

पांच राज्यों में चुनाव का कार्यक्रम जारी, रिजल्ट 11 दिसंबर का आएगा

POLITICAL1 week ago

राजस्थान में चुनाव की तारीख तय, आदर्श आचार संहिता लागू

pratap singh khachriyawas congress leader
Jaipur2 weeks ago

द्रव्यवती ​रिवर प्रोजेक्ट : कांग्रेस ने उद्घाटन को बताया धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ

Ajmer2 weeks ago

गौरव यात्रा का समापन अजमेर में, पीएम मोदी आएंगे

Facebook

Trending