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Internet Troll: आखिर क्या है ये बला?

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आॅनलाइन ट्रोलिंग (Online Trolling) के बारे में आजकल बहुत सुनने को मिलता वर्चुअल दुनिया में जाने—अनजाने में अक्सर लोग इसके शिकार बन जाते है। ट्रोल (Troll) व्यक्तिगत आजादी पर हमला है। सोशल मीड़िया पर अपने विचार व्यक्त करने में लापरवाही और नासमझी ट्रोल का शिकार बना देती है।

सवाल उठता है कि ट्रोलिंग क्या है ? दरअसल इंटरनेट की दुनिया में ट्रोल का मतलब उन लोगों से होता है, जो किसी भी मुद्दे पर चल रही चर्चा में कूद पड़ते है और फिर आक्रामक या अनर्गल कमेंट्स कर विषय को भटका देते हैं। इंटरनेट पर दूसरों को उकसाकर बिना वजह ऐसे मामलों में घसीटते हैं, जिनसे उन्हें मानसिक परेशानी हो सकती है। ये व्यक्ति इस तरह की भाषा का प्रयोग करते है, जिससे व्यक्ति अपनी भावनाएं व्यक्त किए बिना नहीं रह पाता। यह सिलसिला चलता है और कई बाहर धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत भावनाएं तक आहत हो जाती है। दंगा—फसाद जैसे गंभीर परिणाम भी कई बार सामने आते है।

इंटरनेट पर कहां से आया ट्रोल

प्राचीन दंतकथाओं और लोककथा में एक ऐसे भयानक और खतरनाक जीव का उल्लेख मिलता है जो राहगीरों की यात्रा में बाधा डालता है। इस जीव के कारण वे अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाते। इस जीव को ट्रोल कहा जाता है। अब आप समझ गए होंगे कि ट्रोल क्या है। सोशल मीड़िया पर जब किसी स्वस्थ्य मुद्दे पर बहस कर रहे होते है तब कुछ लोग ऐसे अनावश्यक और आक्रमक कमेंट करते है जिससे बहस अपने असली मुद्दे से भटक जाती है। ये अनावश्यक और आक्रमक कमेंट कई बार गंभीर स्थितियां तक पैदा कर देते है।

ट्रोल करने का क्या मकसद है

अब सवाल उठता है कि ट्रोलिंग क्यो होती है। दरअसल इसके पीछे कई वजह है। कई मामलों में देखा जाए तो ट्रोल एक सोची—समझी रणनीति होती है। लोकप्रियता को बढ़ाने या किसी मुद्दे पर सामने वाले को बदनाम करने के लिए इंटरनेट ट्रोलिंग की जाती है। इसके लिए बकायदा प्राफेशनल्स की मदद ली जाती है। ये लोग किसी बहस में जबरन कूद पड़ते है और फिर अपने लक्ष्य के अनुरुप उस बहस की दिशा मोड़ देते है। ये प्रायेाजित होती है। इस तरह की ट्रोलिंग राजनीति या बिजनेस से जुड़े लोग ज्यादा करते है। ये लोग फर्जी ट्रोल्स की फौज खड़ी कर देते है ताकि दूसरे को बदनाम किया जा सके और स्वयं की नेगेटिव पब्लिसिटी को रोका जा सके।

कुछ लोग केवल मजे के लिए करते है। उन्हें दूसरों को परेशान करने में मानसिक सुख मिलता है। कई साल पहले जब लैंड लाइन पर जब कॉलर की जानकारी का पता नहीं चल पाता था तब लोग ब्लैंक कॉल कर लोगों को परेशान करते थे। ये भी ठीक उसी प्रकार की मनोविकृति कही जा सकती है।

इंटरनेट ट्रोलिंग से बचने के उपाय

इंटरनेट ट्रोलिंग का शिकार व्यक्ति जाने—अनजाने में हो जाता है। कुछ सावधानियां रखते हुए ट्रोल से बचा जा सकता है। सोशल मीड़िया पर प्रोफाइल बनाते समय अपनी लोकेशन को सार्वजनिक नहीं करें और दोस्त बनाते समय सामने वाले के बारे में पूरी जानकारी जरुर जुटाए। फर्जी अकाउंट को फॉलो नहीं करें। उसे न ही ​फ्रेंड लिस्ट में जोड़े। फेसबुक और ट्विटर पर प्राइवेसी आॅप्शन को पढ़े और फिर जरुरत के मुताबिक उनका फॉलो करे। यदि कोई व्यक्ति लगातार किसी मुद्दे पर कमेंट कर रहा है तो उसे ब्लॉक भी कर सकते है।

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GST लागू होने से यूं बदलेगी हमारी Life

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ashish jain

आशीष जैन

भारत एक विकासशील देश है। इसे और अधिक विकसित बनाने के लिए देश के टेक्सेशन और फाइनेंस सिस्टम में कभी-कभी बदलाव जरूरी हो जाता है। इसलिए GST जल्द ही देश में लागू होने वाला है लेकिन उससे पहले यह जानना जरूरी है कि GST क्या है, GST की जरूरत क्या है, GST से रोजमर्रा की जिन्दगी में क्या बदलाव आएगा, GST का क्या फायदा होगा। जानते हैं इस सबके बारे में…

देश के अन्दर वर्तमान में करीब 60 से भी अधिक अप्रत्यक्ष कर लागू हैं। सभी राज्यों का अपना वैट एक्ट है और केन्द्रीय सरकार का भी अपना वैट एक्ट है। इसके अलावा कई केन्द्रीय कानून जैसे कि सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और विभिन्न सेस लागू हैं। वहीं राज्य में वैट एन्ट्री टैक्स, मनोरंजन डयूटी, स्टाम्प और कई तरह के टैक्स लागू है। इस तरह से कोई भी एक टैक्स पूरे देश में लागू नहीं होने के कारण टैक्स के फायदे सभी नहीं ले पाते हैं और इसी कारण आम आदमी को टैक्स के ऊपर टैक्स देना होता है, जिसे केसकेडिंग इफेक्ट भी कहा जाता है। इसके परिणाम से इन्फ्लेशन रेट ज्यादा हो जाती है जिसका नुकसान आम आदमी को भुगतना पड़ता है। इन्हीं सभी परेशानियों को खत्म करने के लिए जीएसटी की जरूरत देश में पड़ी। जीएसटी का मतलब एक टैक्स एक देश नियम का लागू होना है। इसके फलस्वरूप पूरा देश किसी भी तरह के व्यापार के लिए एक मार्केट बन जाएगा। जीएसटी सभी तरह के वस्तु और सेवाओं पर लागू होगा, क्योंकि एक टैक्स एक देश नियम लागू होगा, जिससे आम आदमी को टैक्स में बहुत फायदा होगा।

जीएसटी के फायदे

देश की टैक्सेशन फील्ड की अग्रणी कम्पनी सेग इंफोटेक के प्रबंध निदेशक सीए अमित गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में दुनिया में 100 से अधिक देश हैं, जहां जीएसटी पहले से ही लागू है और इन देशों के लिए उन्हीं देशों से व्यापार करना फायदेमंद और सुविधाजनक होता है, जहां जीएसटी लागू है। वाणिज्य के एक्सपर्ट्स की मानें तो जीएसटी के लागू होने के बाद देश की जीडीपी बढ़ेगी और प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ेगी। जीएसटी टैक्स के सिस्टम को सरल कर देगा, जिससे स्टार्टअप्स को व्यापार में अपने कदम जमाने का आसान तरीका मिलेगा। इन सभी फायदों के फलस्वरूप देश में नौकरियां भी बढ़ेंगी। जीएसटी सिस्टम में रजिस्टर सप्लाई चेन सिस्टम जिसके द्वारा ज्यादातर काम ऑनलाइन ही किया जा सकेगा। इसके फलस्वरूप कम से कम मेनुअल काम होगा और गलतियां होने की संभावना भी बहुत कम रह जाएगी। इस प्रक्रिया से भष्टाचार और कालेधन की समस्या हमारे देश से दूर हो जाएगी।

जीएसटी की मौजूदा स्थिति 

जीएसटी की मौजूदा स्थिति

GST – Present and Future

demo

संसद के दोनों ही सदनों ने जीएसटी बिल को मंजूरी दे दी है और अब जीएसटी समिति जीएसटी रेट, टैक्सेज, और बाकी कम्पनशेसन बिल और अन्य बातों पर अन्तिम निर्णय ले रही है। इनके फाइनल होने के बाद जीएसटी बिल को दोनो सदनों में वापिस पेश किया जाएगा। यहां से पारित होने के बाद यह बिल देश के राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया जाएगा ओर उनके हस्ताक्षर के बाद यह जीएसटी बिल जीएसटी कानून बन जाएगा। सरकार जीएसटी को 1 जुलाई 2017 से लागू करने की तैयारियां कर रही है। इसी के चलते सरकार ने सुझावों के लिए जीएसटी ड्राफ्ट, कुछ रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, चालान फॉम्स जारी किए हैं।

जीएसटी की प्रक्रिया

जीएसटी में 3 मासिक रिटर्न उपलब्ध होगी –
प्रत्येक 10 तारीख को – सेल्स रजिस्टर उपलब्ध होगी।
प्रत्येक 15 तारीख को – परचेज रजिस्टर उपलब्ध होगी।
प्रत्येक 20 तारीख को – फाइनल मासिक रिटर्न उपलब्ध होगी।

 जीएसटी में सेल्स एण्ड परचेज रिटर्न को रोज उपलब्ध करने की सुविधा दी गई है और इसी से आखिरी तारीख का दबाव खत्म किया जा सकता है। गवर्नमेंट की वेबसाइट का लोड कम करने के लिए जीएसटीएन विभाग जीएसपी (जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर) ओर एएसपी (एसोसिएट सुविधा प्रावाइडर) की मदद से इस सिस्टम को मैनेज करेगा।

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सियासी दल भी क्यों न कैशलेस चंदा लें…

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अशोक चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार anchaturvedi@yahoo.com

जिस कैशलेस की आज बात की जा रही है, बेशक उसके मायने अलग हैं लेकिन यह शब्ह सदियों से हमारी जिंदगी में काफी अहम स्थान रखता है। किसी जमाने में जब व्यक्ति ‘केशलेस’ होने लगता था तो कहा जाता था कि वह पैसेवाला बनने वाला है। जब भी कोई ऐसी बात करता तो व्यक्ति विशेष को खासा आनंद अनुभव होता था, हालांकि उसका ‘केशलेस’ होना, कब पैसेवाला बनाता था, इसके कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं लेकिन हमारे बुजुर्गों ने कुछ सोच-समझ कर ही यह कहा होगा। समय का खेल देखिए, आज हमारी सरकार भी ‘कैशलेस’ की बात कर रही है, हालांकि इसके अर्थ अलग हैं। हम ‘केशलेस’ को रोकड़े से जोड़ते रहे और अब सरकार हमें ‘कैशलेस’ कर जीने का सुनहरा सपना भी हमसे छीन रही है। मुद्दे पर सियासी अखाड़े में जंग छिड़ी हुई है। बड़े-बड़े नेता रोज एक-दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं। लोगों को भी यह देखकर शायद कुछ सुकुन मिल रहा होगा लेकिन हकीकत जो दिख रहा है वह नहीं है। सतही तौर पर दिख रहा नजारा अंदरखाने में कुछ और है। मुद्दा यह है कि दुनियाजहान के लिए कैशलेस की बात करनी वाली मोदी सरकार क्या यह पहल करेगी कि सियासी पार्टियां भी कैशलेस ही चंदा लें और भाजपा इसकी शुरूआत करे? शायद नहीं……,यह सभी जानते हैं। कायदे-कानून गरीब और कमजोर लोगों के लिए बनाए जाते हैं। समर्थ को तो दोष देवी-देवताओं के जमाने में भी नहीं दिया जाता था अब तो फिर भी कलयुग है, जहां जरूरत के हिसाब से नियम तोड़े और बनाए जाते हैं। आज ही एक खबर चल रही है कि बीस हजार से ज्यादा का गुमनाम चंदा पाने में भाजपा अव्वल है। असल में हमाम में नंगे हमारे सियासतदां बाहर आते ही पाक-दामन होने का दम भरते हैं। यह हमारे मुल्क की त्रासदी है कि गरीब व कम पढ़ा तबका इनकी चिकनी-चिपड़ी बातों में आ जाता है। वोटों की सुई जिस तरफ ज्यादा घूम जाती है, वह दल ही इसे जनादेश का कहकर ढिंढोरा पीटने लगता है। सच तो यह है कि नोटबंदी के इस दौर में 95 फीसदी देशवासी आंकड़ों की भाषा से अनभिज्ञ है। सुन-सुन कर और देख-देख कर वह भी इसे बेहतर फैसला बता रहा है या विरोध कर रहा है। अगर, जरा भी उसने विशेषज्ञों की राय को जाना होता और थोड़ा होमवर्क किया होता तो देश का माहौल कुछ और ही होता। लेकिन यह इस देश का दुर्भाग्य है कि लोग पार्टियों में बंटे हैं और नेताओं के प्रति निष्ठावान हैं। नेता आह्त हो तो सिर तक मुंडवा लेते हैं। अतीत में साधु रूपी शैतान देश को ठगते रहे और अब खादी में छुपा चेहरा हमारा भाग्य विधाता बन बैठा है। गरीबों की झौंपड़ी में कई दिनों तक चूल्हा न जले तो कौन शोर मचाने वाला है। लेकिन लाखों के सूट पहनने वाला रोज अपना ड्रेस कोड बदलता है। उत्तरप्रदेश की एक सभा में इसी नेता ने कहा था कि उसे शीर्ष पर बैठाइए, राजनीति से अपराध के नासूर को खत्म कर दूंगा। भोली जनता ने जनादेश दिया, आज यह नेता शीर्ष पर है लेकिन उसकी पार्टी में ही आपराधिक रिकॉर्ड वाले सांसदों की संख्या ज्यादा है। बड़ी-बड़ी बातें और बड़े लोगों के कर्जे माफ करने में हाथ नहीं कांपते, गरीब-किसानों का कर्ज भारी लगता है। पार्टी नेता की ‘शहजादी’ की शादी पर पांच सौ करोड़ नहीं दिखते, बैंक में किसी ने पचास हजार भी एक साथ जमा करा दिए तो पोस्टमार्टम करेंगे। एक पालिका में बहुमत पा लेने से उन्माद में आई यह पार्टी इसे ही देश के लोगों का मूड बताने पर तुली है। दरअसल, जब हम सत्ता में होते हैं तो हमें सब कुछ सुनहरा ही दिखाई देता है। हकीकत या तो हम जानना नहीं चाहते या लोग पहुंचने नहीं देते। इसका जो नतीजा होता है, भयावह होता है। बड़े-बड़े राजा-महाराजा नहीं रहे अब तो फिर भी कथित लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जहां लोग अपना पैसा ही नहीं निकाल सकते। विचारिए, सोचिए और जल्द फैसला लीजिए…..निर्णय भी ऐसा जो धरातल से जुड़ा हो न कि फाइव स्टार संस्कृति को पोषित करने वाला। वरना, यह जनता-जर्नादन है। प्यार करती है तो सिर पर लेकर चलती है और पटकती है तो चाय बेचने लायक भी नहीं छोड़ती।

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राजस्थान में जन विकास के तीन साल 

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बाल मुकुन्द ओझा

राज्य सरकार ने पिछलेे तीन सालों में राजस्थान को अग्रिम पंक्ति का राज्य बनाने के लिए नीतिगत सुधारों की पहल की है और आम नागरिक के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित भाव से प्रयास किए हैं। जनजन में बेहद लोकप्रिय और व्यापक जनाधार वाली नेत्री वसुन्धरा राजे ने 13 दिसम्बर, 2013 को दूसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए यह संकल्प लिया था कि मुझे राजस्थान की जनता से अभूतपूर्व समर्थन, प्यार और स्नेह प्राप्त हुआ है जिसके लिए मैं सदैव ऋणी रहूंगी । यही समर्थन मुझे अधिक से अधिक श्रम और बेहतर कार्य करने का उत्साह प्रदान करेगा । समस्याओं का सर्वोच्च प्राथमिकता से निवारण करने का संकल्प लेकर श्रीमती राजे ने गत तीन वर्षों में जनता से अपना सीधा जुड़ाव जारी रखा और हर जन संकट के दौरान गरीब के झौंपड़े  तक पहुंची इसी कारण उन्हें जन जन का प्यार, समर्थन और विश्वास हासिल हुआ।

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पिछलेे तीन सालों से जनसेवा की अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के आर्थिक विकास और आधारभूत ढांचे को जन आंकाक्षाओं के अनुरूप मजबूत बनाने में जुटी हैं। उन्होंने कहा हम एक खुशहाल, शिक्षित, संवेदनशील और समृद्ध राजस्थान की कामना करते हैं । जब समाज के सभी वर्ग सौहार्दपूर्वक इस दिशा में प्रयासरत होंगे तभी हम एक सशक्त राजस्थान का नवनिर्माण कर पाएंगे। हम सुनिश्चित करते हैं कि समाज के सभी वगोर्ं के साथ बेहतर तालमेल के साथ कार्य हो। राजस्थान के समग्र विकास, शान्ति और आपसी सौहार्द के लिए मुख्यमंत्री ने आम जन से  कदम से कदम मिलाकर  ’’आओ साथ चलें’’,  का आह्वान भी किया है।  मुख्यमंत्री की सोच है कि रोजमर्रा के कार्यों के लिए सरकार और आमजन के बीच आपसी संवाद को और आसान कैसे बनाया जाये, इसके लिए अधिक तत्परता व सजगता से काम करना होगा।  सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार  सुशासन के महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। इन  मूलभूत सुविधाओं व आर्थिक विकास के माध्यम से सामाजिक विकास के सभी को एक जुट होकर प्रयास करने की जरुरत है तभी मुस्कराते राजस्थान का हमारा सपना साकार होगा। सीएजी की रिपोर्ट में भी राज्य की सराहना की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में सामाजिक और भौतिक आधारभूत ढांचा बेहतर बजट व्यय को दर्शाता है। रिपोर्ट में विकास, सामाजिक क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और पूंजीगत व्यय का राज्यवार अध्ययन किया गया है। उसमें सामने आया कि राजस्थान का इन सातों श्रेणियों में खर्च राष्ट्रीय औसत से अधिक है जो प्रदेश के लिए गौरव की बात है। राजस्थान को विकास के स्वर्ण युग में सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विजन -2020 का लक्ष्य निर्धारित किया है ।

विजन दस्तावेज में पाँच मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गयी है जिनमें निवेश को बढ़ावा बेरोजगारी को कम करना अर्थव्यवस्था शिक्षा और कौशल विकास में सुधार शामिल हैं। इसी विजन को अमलीजामा पहनाते हुए राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल हर क्षेत्र में चहुंमुखी प्रगति और विकास के सौपान तय कर जन विश्वास को हासिल किया है।

शिक्षा  (Education) 

शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को अपनाते हुए राजस्थान में विकास के नए आयाम स्थापित हुए है। राजस्थान देशभर में पहला राज्य है, जहां सरकारी स्कूलों में नामांकन में 13 लाख की अतिरिक्त वृद्धि हुई है। यह अपने आप में एक नया इतिहास बना है। शिक्षकों को पोस्टिंग के स्थान का चयन करने का मौका काउंसलिंग सिस्टम के जरिए दिया। इससे शिक्षकों को किसी के आगे-पीछे चक्कर काटने नहीं पड़े। इससे उनका मान-सम्मान बढ़ा। सरकार ने पहली बार प्राइमरी स्कूलों में सब्जेक्ट टीचर्स व्यवस्था पर अमल किया। इससे शिक्षा में नए आयाम स्थापित होंगे। बालिका शिक्षा प्रोत्साहन के लिए सरकार की ओर से आपणी बेटी योजना, राजश्री योजना, निशुल्क साइकिल वितरण, यात्रा भत्ता देने जैसी विभिन्न योजनाएं शुरू की गई है। देश में राजस्थान ही पहला राज्य हैै, जहां एक साथ एक लाख शिक्षकों को पदोन्नति देने का रिकार्ड बनने जा रहा है। इससे प्रदेश में शिक्षकों की कमी 51 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गई हैै। ऊर्जा ऊर्जा बचत के तहत राजस्थान ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस योजना में देशभर में 26 नवम्बर 2016 तक 14 लाख 23 हजार 748 घरेलू  एलईडी लाइटें लगाई गई जिनमें  से  अकेले राजस्थान में सर्वाधिक 5 लाख 37 हजार लाइटें लगाई गई। इसी भांति स्ट्रीट लाइट प्रोग्राम में भी राजस्थान अव्वल रहा है। सोडियम और टयूब लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगाने से करीब 55 से 60 प्रतिशत ऊर्जा बचत होगी। 35 नगरीय निकायों में यह कार्य पूरा  हो चुका है , 48 में प्रगति पर है और 98 में प्रक्रियाधीन है।

विद्युत उत्पादन (Electricity Production)

राज्य सरकार प्रदेश को विद्युत उत्पादन की दृष्टि से आत्म निर्भर बनाने की ओर अग्रसर है। राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा नीति 2014 जारी की । नीति लागू होने के बाद प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन एवं सौलर पार्क विकसित करने हेतु एमओयू किये गए। वर्तमान में राजस्थान प्रदेश की विद्युत अधिष्ठापित क्षमता 17,580 मेगावाट है। प्रदेश में गत तीन वर्षों में राज्य क्षेत्र में 1750 मेगावाट, केन्द्रीय आवंटन से 288 मेगावाट, निजी क्षेत्र से 1014 मेगावाट एवं अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 1700 मेगावाट सहित 4,752 मेगावाट की वृद्धि की गई है जबकि पूर्ववर्ती सरकार के प्रारंभिक तीन वर्षों में 2,822 मेगावाट की ही बढ़ोतरी हुई थी। उद्योग देशी  और विदेशी निवेश दोनों लिहाज से राजस्थान को आकर्षक स्थल के रूप में विकसित करने के साथ  राजस्थान को औद्योगिक निवेश का अगुआ बनाने के लिए ‘टीम राजस्थान’ अथक प्रयास कर रही है। भारत में देश-केंद्रित विशेष क्षेत्र स्थापित करने में हम अग्रणी हैं। राजस्थान में पहले से ही जापानी और कोरियाई निवेश क्षेत्र हैं। नीमराणा में जापानी क्षेत्र की सफलता के बाद राज्य सरकार घिलोठ में तकरीबन 500 एकड़ जमीन में दूसरा औद्योगिक निवेश क्षेत्र विकसित कर रही है। उद्यमियों की सहायतार्थ राज्य की खनिज सम्पदा के पर्याप्त दोहन एवं खनन उत्पादन में वृद्धि के लिए नई खनन नीति-2015 जारी की गई। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2014 लागू की गई। योजना के तहत 902 उद्यमियों ने 15 हजार 289 करोड़ रुपये का निवेश किया। गत तीन वर्षों में बीआईपी में 37494 करोड़ से अधिक राशि के 249 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए जिनमें से 8075 करोड़ के 119 प्रस्तावों को स्वीकृत किया गया। राज्य केबिनेट ने अब तक 20533 करोड़ के निवेश प्रस्ताव अनुमोदित किये है। राजस्थान स्टार्टअप पालिसी -2015 भी जारी की गई।

अन्नपूर्णा भण्डार (Annapurna Bhandar)

पांच हजार से अधिक अन्नपूर्णा भण्डारों पर 150 से ज्यादा वस्तुएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसी भांति सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाकर कालाबाजारी को रोकने हेतु बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद खाद्यान वितरित किया जा रहा है। प्रदेश में 25 हजार उचित मूल्य की दुकानों पर अब तक यह व्यवस्था कर 139 लाख रूपये  से अधिक का लेन देन किया जा चुका है। स्वच्छ भारत मिशन स्वच्छ भारत मिशन -ग्रामीण  के तहत शौचालय निर्माण में राजस्थान देश में अव्वल है। बीकानेर को प्रदेश का पहला खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित किया गया  है। प्रदेश में अब तक 43 लाख 47 हजार परिवारों को शौचालय सुविधा सुलभ कराई जा चुकी है। स्वच्छ भारत मिशन -नगरीय   के तहत  प्रदेश में अब तक 70 हजार से अधिक  परिवारों को शौचालय सुविधा सुलभ कराई जा चुकी है। धरोहर संरक्षण राजस्थान की ऎतिहासिक धरोहर व संस्कृति, सभ्यता, गौरवशाली इतिहास के संरक्षण तथा इनके विकास हेतु राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रौन्नति प्राधिकरण का पुनर्गठन किया गया है। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का यात्रियों की सुविधा हेतु सेवायें विकसित करने एवं ऎसे स्थलों का जीर्णोद्धार करने के लिए मास्टर प्लान बनाकर विकास कार्य कराये जा रहे है। राज्य में टैम्पल टाउन अधिनियम बनाकर तीर्थाटन के विकास का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत कुल देवताओं के धर्मस्थलों के विकास करने तथा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित देवस्थान विभाग के एवं विभिन्न पंजीकृत प्रन्यासों द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित जन आस्था के 38 प्रमुख धर्मस्थलों को चिन्हित किया गया है। प्रदेश में अजमेर, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़, जोधपुर, पाली, बीकानेर, सीकर एवं जैसलमेर के राजकीय संग्रहालयों तथा जवाहर कला केन्द्र एवं रवीन्द्र मंच के विकास कार्य करवाये जा रहे हैं।

सड़क विकास (Road Development)

राज्य की समस्त पंचायत मुख्यालयों पर 0.5 किलोमीटर से 2 किलोमीटर लम्बी सड़क का चयन कर कंक्रीट सड़क एवं नाली निर्माण के तहत प्रथम चरण में 1972 पंचायत मुख्यालयों में 1720 किलो मीटर के गौरव पथ सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। ग्रामीण गौरव पथ के द्वितीय चरण में 1253 करोड़ रुपये के 2086 ग्रामीण गौरव पथ स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन चार गांवों को ग्रामीण गौरव पथ से जोड़ा जा रहा है और प्रतिदिन औसतन 14 किलोमीटर सड़कें बनाई जा रही हैं।  ग्रामीण गौरव पथ  के रूप में निर्मित इन सड़कों से आम आदमी का आवागमन बेहद आसान हो गया है। राज्य में सड़कों के विकास पर औसतन 4 हजार 348 औसतन तथा कुल 12 हजार 508 करोड़ व्यय।पर्यटन राज्य में पर्यटन क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विकास एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन इकाई नीति 2015 लागू की गई। इस नीति में पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न इकाइयों को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिनमें अब होटल, मोटेल, हैरिटेज होटल, बजट होटल, रेस्टोरेन्ट, केम्पिंग साइट, माइसध्कनवेन्षन सेन्टर, स्पोट्र्स रिसोर्ट, रिसोर्ट, हैल्थ रिसोर्ट, एम्यूजमेन्ट पार्क, एनिमल सफारी पार्क, रोप वे, ट्यूरिस्ट लग्जरी कोच, केरावेन एवं क्रूज पर्यटन समिलित है। राज्य सरकार के प्रोत्साहन के फलस्वरूप पर्यटकों की संख्या में बीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पर्यटन क्षेत्रों के विकास कायोर्ं के प्रावधान में 79 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।  पिछले कुछ सालों में जयपुर एक ‘हैपनिंग प्लेस‘ बन गया है। यहां की कला, संस्कृति, संगीत एवं ऎतिहासिक धरोहरों ने दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यूनेस्को ने इस शहर को ‘सिटी ऑफ क्राफ्ट्स‘ जबकि वर्ल्ड क्राफ्ट्स काउंसिल ने इसे ‘क्राफ्ट्स सिटी‘ का दर्जा दिया है।

कौशल विकास  (Koshal Vikas Yojana)

राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास के माध्यम से 10 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये। इनमें एक लाख युवाओं को सरकारी क्षेत्र में नियमित नियुक्तियां और 8 लाख 91 हजार को गैर सरकारी क्षेत्र में रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराइ गई। राज्य में एक लाख 63 हजार 673 युवाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किये गए। राज्य को लगातार दो वर्ष 2014-15 व 2015-15 में सर्वश्रेष्ठ कौशल प्रदाता राज्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड ट्राफी दी गई। आहत को राहत राज्य सरकार ने एक अनूठा ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। राज्य की मुख्यमंत्री एवं मंत्रीगण संभागों के गांव-गांव तक जाकर आम-जन की परेशानियां सुनते हैं और जहां तक संभव हो, उनका त्वरित गति से हल निकालने का प्रयास करते हैं। आमजन की समस्याओं के शीघ्र, सरल और व्यवस्थित समाधान के लिए ‘राजस्थान सम्पर्क’ पोर्टल विकसित किया गया। पिछलेे तीन सालों में दस लाख से अधिक प्रकरण पोर्टल पर प्राप्त हुए जिनमें से लगभग 9 लाख प्रकरणों का निस्तारण किया गया। प्रदेश में आलोच्य अवधि में न्याय आपके द्वार अभियान में 69 लाख 89 हजार प्रकरणों का रिकार्ड निस्तारण कर लोगों को राहत पहुंचाई गई। भामाशाह योजना महिला सशक्तीकरण एवं राज्य के समस्त गरीब परिवारों के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य की पूर्ति हेतु भामाशाह योजना-2014 लागू की गई। भामाशाह योजना में अब तक एक करोड़  30 लाख परिवारों के 462 लाख से अधिक व्यक्तियों का नामांकन किया जा चुका है।  विभिन्न योजनाओं के तहत 4700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की गयी है।

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा  (Bhamashah Swasthya Bima Yojana)

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की उपलब्धियों की परिणाम उत्साहजनक हैं एवं योजना के तहत् प्रतिदिन करोड़ों रुपयों की राशि के क्लेम निरंतर बुक किये जा रहे हैं। अब तक 297 करोड़ के बीमा क्लेम बुक कराये जा चुके हैं। वर्तमान में 6 लाख से अधिक मरीजों का कैशलेस उपचार किया जा चुका है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से हृदय रोग से ग्रसित मरीजोें को बायपास सर्जरी, हार्ट वाल्व रिपेयर, एंजियोप्लास्टी, जन्मजात हृदय विकार, कैंसर, ब्रेन सर्जरी, स्पाइनल सर्जरी, यूरोलजी में डायलिसिस, किडनी एवं ब्लेडर संबंधी रोगो, फेफडो की सर्जरी तथा प्लास्टिक सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों में भी मरीजों को कैशलेस उपचार का लाभ मिल रहा है। योजना के तहत अब तक 1116 राजकीय और निजी चिकित्सालयों को जोड़ा जा चुका है। मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन अभियान राज्य में पेयजल और घरेलू आपूर्ति के लिए 70 फीसदी भूमिगत जल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन अब भूमिगत जल भी खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया है। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की शुरुआत की थी जो ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान है। राजस्थान को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और हरा-भरा बनाने  के लिए बने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान से राजस्थान की न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में पहचान बनी है और दूसरे राज्य व देश भी हमारे मॉडल को अपनाने जा रहे हैं।  जन आंदोलन के रूप में चल रहे इस अभियान ने राजस्थान की तस्वीर बदल दी है। अभियान में चयनित क्षेत्रों के जलाशय आज लबालब हैं, सूखे जोहड़, कुएं और हैंडपंपों में पानी आ गया है।  पहले चरण में संग्रहित हुए करीब 11 हजार 170 मिलियन क्यूबिक फीट जल से करीब 41 लाख लोग तथा 45 लाख पशुधन सीधे लाभान्वित हुए हैं। 94 हजार 418 कार्य पूर्ण हुए साथ ही अभियान में जल संरचनाओं के आस-पास करीब 28 लाख पौधे लगाने का भी ऎतिहासिक काम हुआ है। दूसरे चरण में गांवों के साथ-साथ शहरों को भी जोड़ा है। साथ ही नई तकनीक एवं नवाचारों का उपयोग करते हुए इसे पहले से अधिक व्यापक बनाया है। जिसके तहत ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ इस साल 66 नगरीय निकायों में भी जल संरक्षण के काम किए जाएंगे। ग्राम राज्य की राजधानी जयपुर में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट -2016 का ऎतिहासिक आयोजन 9 से 11 नवम्बर 2016  को संपन्न हुआ। इस आयोजन से राजस्थान में एक नई कृषि क्रांति की शुरुआत हुई है। यह आयोजन प्रदेश के लाखों किसानों और पशुपालकों के खेत खलिहानों में समृद्धि की फसल उगाने में कामयाब होने के  साथ  उनके चेहरे पर मुस्कान लायेगा ऎसी आशा व्यक्त की जारही है।मुख्यमंत्री और केंद्रीय शहरी विकास  मंत्री की मौजूदगी में सम्मलेन में 4 हजार 400 करोड़ रूपये के 38 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इनमें कृषि विपणन में सर्वाधिक 21 कृषि उत्पादन में 7, उद्यानिकी और पशुपालन में पांच पांच एमओयू किये गए है। इससे लगभग 47 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। जिन कंपनियों से एमओयू हुए है उनमें महिंद्रा एन्ड महिंद्रा,टैफे, जन डियर के साथ इ एम् 3 एग्री सर्विसेज का संयुक्त उपक्रम जैसी महत्वपूर्ण कम्पनियाँ शामिल है। इस आयोजन में प्रदेशभर के 58 हजार किसानों ने भाग लिया।

रिसर्जेण्ट राजस्थान  (Resurgent Rajasthan)

राज्य की राजधानी, जयपुर में 19 और 20 नवम्बर, 2015 को राजस्थान रिसर्जेंट पार्टनरशिप समिट-2015 में राज्य में आर्थिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए । इनमें सौर ऊर्जा परियोनाओं को छोड़कर  अब तक 1.45 लाख  करोड़ रूपये के निवेश में से करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये का निवेश विभिन्न  स्तरों पर क्रियान्विती  की प्रक्रिया में है। यह किसी भी पार्टनरशिप समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के अमल में आने की संभवत सर्वाधिक उपलब्धि दर है। आज राजस्थान हर क्षेत्र में प्रगति के नये कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के अग्रिम पंक्ति के राज्यों में शामिल हो चुका है। आने वाले दो वर्षों में प्रगति की यह गति और अधिक बढ़ेगी और चहुंमुखी विकास की नई इबारत लिखेगा।

(ये लेखक के अपने विचार है)

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