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धर्म संसार

इन्दिरा एकादशी: इस व्रत की ​कथा सुनने से वायपेय यज्ञ का फल मिलता है

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मालीराम वर्मा

मालीराम वर्मा

अश्विनी मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी इन्दिरा एकादशी या इन्द्राणी एकादशी कहलाती है। गुजरात, महाराष्ट्र समेत कुछ क्षेत्रों में भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी का व्रत किया जाता है। लेकिन, अधिकांश स्थानों पर अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी का व्रत होता है।

श्राद्ध पक्ष में होने से इस एकादशी का खास महत्व है। माना जाता है कि इन्दिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों का कल्याण होता है। धर्मग्रंथों में बताया गया है कि इन्दिरा एकादशी का व्रत साधक की मृत्यु के बाद भी प्रभावित करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के पापों का नाश होता है तथा वह स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त करता है। इस व्रत के प्रभाव से पितृदोष भी समाप्त होता है। इस व्रत की कथा का महत्व भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। उन्होंने कहा था कि इन्दिरा एकादशी पापों को नाश करने वाली तथा पितृों को मोक्ष प्रदान करने वाली होती है। इसकी कथा सुनने से वायपेय यज्ञ करने के समान फल मिलता है।

इन्दिरा एकादशी की कथा

सतयुग में माहिष्मीति नगर में इन्द्रसेन नामक राजा हुए थे। प्रजा के हितेषी और धर्मपरायण होने से राजा का यश चारों ओर फैल गया था। राजा इन्द्रसेन भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। एक दिन राजा राजसभा में बैठे हुए थे। तभी वहां देवर्षि नारद आते है। राजा ने उनका स्वागत किया और सम्मान पूर्वक उन्हें आसन पर बिठाया। इसके बाद राजा ने नारद जी के महिष्मीति नगर आने का कारण पूछा।
नारदजी ने बताया कि वे उनके स्वर्गीय पिता का सन्देश लेकर आए है। राजा आश्चर्य में पड़ गए। नारद जी ने बताया कि हे राजन! तुम्हारे पिता को मैने यमलोक में देखा था। वे व्रतभंग के दोष से वहां आए थे। उन्होंने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है कि तुम उनके मोक्ष के लिए इन्दिरा एकादशी का व्रत करों। इस व्रत के करने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी।
राजा ने पूछा: भगवन्! कृपा करके ‘इन्दिरा एकादशी’ का व्रत बताइए। यह व्रत कब और किस पक्ष में, किस तिथि को और किस विधि से किया जाता है। मैं यह व्रत करके अपने पिता को मोक्ष दिलाउंगा।
नारदजी ने इस व्रत का विधान बताते हुए कहा: हे राजन! आश्विन मास के कृष्णपक्ष में दशमी के दिन को श्रद्धापूर्वक प्रातःकाल स्नान करना। फिर मध्याह्नकाल में स्नान करके एकाग्रचित्त हो एक समय भोजन करना तथा रात्रि में भूमि पर सोना। अगले दिन प्रात: नित्यकर्म से निवृत होकर सालिग्राम भगवान का ध्यान करते हुए यह मंत्र पढ़ना और उपवास का नियम धारण करना।

अघ स्थित्वा निराहारः सर्वभोगविवर्जितः। श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत ॥

इसके बाद पिता का विधिपूर्वक श्राद्ध करना और ब्राह्मणों का सत्कार कर उन्हें भोजन कराना। पितरों को दिए हुए अन्नमय पिण्ड को सूंघकर गाय को खिला देना। उसके बाद शाम को धूप और गन्ध आदि से भगवान ह्रषिकेश का पूजन करना और रात्रि में उनके समीप जागरण करना। द्वादशी के दिन पुनः भक्तिपूर्वक श्रीहरि की पूजा करो। उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर भाई बन्धु, नाती और पुत्र आदि के साथ स्वयं मौन होकर भोजन करना।
राजा ने नारद जी के कहे अनुसार व्रत का पालन किया। व्रत पूर्ण होने पर आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी तथा इन्द्रसेन के पिता गरुड़ पर आरुढ़ होकर श्रीविष्णुधाम को चले गए। इस प्रकार इन्दिरा एकादशी व्रत का सभी प्रकार के कष्टों को दूर करता है।

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शबरीमाला: RSS का आरोप हिंदुओं पर ज्यादती कर रही है केरल सरकार

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुक्रवार से यहां ग्वालियर में शुरू हुई। इस प्रतिनिधि सभा में शबरीमला मंदिर मामला और परिवार व्यवस्था के संरक्षण पर पारित किए जाएंगे।

यहां केदारधाम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में बैठक का शुभारंभ सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने भारतमाता के चरणों में पुष्प अर्पित कर किया। बैठक के दौरान विभिन्न सत्रों में होने वाली चर्चा की पत्रकारों को जानकारी दी। सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने बताया कि शबरीमला देवस्थान मामला सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ा है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दखल की आड़ लेकर केरल सरकार हिन्दू श्रद्धालुओं के साथ ज्यादाती कर रही है। इस विषय पर बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

बैठक में वर्तमान परिस्थितियों में परिवार व्यवस्था के समक्ष चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। संघ इस विषय में भारतीय दर्शन के अनुसार ‘मैं से हम’ तक जाने की प्रक्रिया पर समाज के बीच काम करेगा।

आरएसएस की प्रतिनिधि सभा

वैद्य ने बताया कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संघ कार्य के संबंध में निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है। इसकी बैठक वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। यह बैठक एक साल दक्षिण में, एक साल उत्तर में एवं तीसरे वर्ष नागपुर में होती है। जहां प्रति दो हजार स्वयंसेवकों पर एक प्रतिनिधि का चयन किया जाता है। यह बैठक संगठन कार्य के विस्तार, दृढ़ीकरण एवं विविध प्रांतों के विशेष कार्य, प्रयोग एवं अनुभव साझा करने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। बैठक में समाज जीवन में सक्रिय 35 संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा भी वृत्त रखा जाता है। इसके अलावा संघ शिक्षा वर्गों के प्रवास व प्रशिक्षण तथा अगले वर्ष की कार्ययोजना भी इस बैठक में तैयार की जाती है।

राम मंदिर मामले पर सवाल को लेकर डॉ. वैद्य ने कहा कि इस मामले में संबंधित पक्ष न्यायालय में अपनी बात रख चुके हैं। अब इसे सर्वोच्च न्यायालय को देखना है। बैठक में लोकसभा चुनाव पर चर्चा के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति पर चर्चा नहीं होगी, लेकिन सभी लोग मतदान प्रक्रिया में भाग लें और चुनाव में 100% मतदान हो, इस के लिए स्वयंसेवक समाज में जनजागरण करेंगे।

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यूनेस्को भी मानता है कुंभ का महत्व

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कुंभ का महत्व यूनेस्को भी मानता है। इसलिये कुंभ को सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।

प्रयागराज में कुंभ का मेला 14-15 जनवरी से शुरू होगा। इसके लिए संगम नगरी में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। संगम नगरी में अखाड़ों का शाही प्रवेश भी शुरू हो गया है। सबसे बड़े श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा और श्रीपंच अग्नि अखाड़े के साधु-संत गाजे-बाजे के साथ पहुंचे। इनकी पेशवाई अखाड़े के शिविर मौज गिरि से सुबह 11 बजे गाजे बाजे के साथ शुरू हुई। पेशवाई में अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि मौजूद थे।

पेशवाई के दौरान बड़ी संख्या में अखाड़े के महंत और संत घोड़ों, हाथी और ऊंटों पर सवार होकर निकले। जयकारों से संगमनगरी गूंज उठी। नागाओं ने लाठी-डंडों के करतब दिखाए। जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थें।

हिंदुओं की धार्मिक आस्था के केंद्र कुंभ मेले का महत्व यूनेस्को भी मानता है। विश्व स्तरीय इस संस्था ने दिसंबर 2017 में कुंभ को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया था।

कुंभ मेला इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में लगता है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते है। कुंभ मेला धार्मिक उत्सव के तौर पर सहिष्णुता और समग्रता को दर्शाता है। यह खासतौर पर समकालीन दुनिया के लिए अनमोल है। कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़े धार्मिक समागम है। इसलिए ये सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है।

पांच हजार कॉटेज बन रहे


25 किमी में कुंभ मेला लगेगा, जो करीब 45 दिन तक चलेगा। कुंभनगरी में एक लाख टेंट लगाए जाएंगे। पांच सितारा सुविधाओं वाले पांच हजार कॉटेज बनाए जा रहे हैं।

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कुंभ मेला 2019: प्रयागराज पहुंचने के लिए चुन सकते है यें विकल्प

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कुंभ मेला पर्व 2019 में जनवरी से मार्च तक प्रयागराज में आयोजित होगा। कुंभ में जाने के लिए प्लान कर रहे तो जान लें कि आप प्रयागराज कैसे पहुंच सकते है।

प्रयागराज देश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक केन्द्र है। प्रयागराज वायु, रेल एवं सड़क मार्ग से भारत के सभी बड़े शहरों से जुडा है। ऐसे में कुंभ स्नान के लिए आप रेल मार्ग, वायु मार्ग या हवाई मार्ग का विकल्प चुन सकते हैं। वहां पहुंचने पर आप स्थानीय परिवहन साधन जैसे बस, आटो, टैक्सी आदि का इस्तेमाल कर सकते है। सरकार ने इसके लिए विशेष इंतजाम करने का दावा किया है।

तीर्थराज प्रयाग शहर सड़क परिवहन हेतु राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग तंत्र से जुड़ा है। राज्य संचालित बसें सम्पूर्ण देश में कई बड़े स्थानों से उपलब्ध हैं। यूपी०एस०आर०टी०सी० (उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) से बुकिंग की जा सकती है। कई निजी ट्रेवल एजेंट्स भी बड़े शहरों से मार्गों पर निजी बसों का संचालन करते हैं।


रेलमार्ग से यूं पहुंचे प्रयाग

इसी तरह इलाहाबाद शहर रेल मार्ग से भी भारत के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। इलाहाबाद में एवं इसके चारों ओर कुंभ मेले के लिए 10 रेलवे स्टेशन सूचीबद्ध किए गए है। यहां से आप टिकट बुकिंग करा सकते है।

इलाहाबाद छिवकी (एसीओआई)

नैनी जंक्शन (एनवाईएन)

इलाहाबाद जंक्शन (एएलडी)

फाफामऊ जंक्शन (पीएफएम)

सूबेदारगंज (एस०एफ०जी०)

इलाहाबाद सिटी (एएलवाई)

दारागंज (डीआरजीजे)

झूसी (जेआई)

प्रयाग घाट (पीवाईजी)

प्रयाग जंक्शन (पीआरजी)

इसके अतिरिक्त बुकिंग आईआरसीटीसी बेवसाइट एवं रेलकुम्भ ऐप (विशेष रेल) से की जा सकती है।

वायुमार्ग से यूं पहुंचे प्रयाग

प्रयागराज एयरपोर्ट बमरौली में शहर से करीब 12 किमी दूर स्थित है। प्रयागराज से कई प्रमुख शहरों के लिए नियमित एवं शेड्यूल्ड उड़ानें उपलब्ध है।

क्रम सं०क्षेत्र बिन्दु/गमन बिन्दुसंचालकआवृत्ति
1दिल्लीएयर इंडियनदैनिक
2लखनऊजेट एयरवेजमंगल/बृह०/रवि०
3पटनाजेट एयरवेजमंगल/बृह०/रवि०
4इन्दौरजेट एयरवेजसोम०/बुध०/शनि०
5नागपुरजेट एयरवेजसोम०/बुध०/शनि०

नीचे सूचीबद्ध किये गये वायु मार्ग प्रस्तावित हैं और शीघ्र आरंभ होंगे

क्रम सं०क्षेत्र बिन्दु/गमन बिन्दुसंचालक
1पुणेइंडिगो एयरलाइन्स
2रायपुरइंडिगो एयरलाइन्स
3बंगलौरइंडिगो एयरलाइन्स
4भुवनेश्वरइंडिगो एयरलाइन्स
5भोपालइंडिगो एयरलाइन्स
6देहरादूनइंडिगो एयरलाइन्स
7मुम्बईइंडिगो एयरलाइन्स
8गोरखपुरइंडिगो एयरलाइन्स
9कोलकाताजूम एयर
10लखनऊटर्बो एवियेशन

उड़ानें निकट के शहरों वाराणसी (अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, प्रयागराज से 130 कि०मी० दूर) लखनऊ (अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, प्रयागराज से 200 कि०मी० दूर) और कानपुर (घरेलू एयरपोर्ट, प्रयागराज से 200 कि०मी० दूर) से भी बुक की जा सकेंगी।

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