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धर्म संसार

इस एकादशी का व्रत करने पर मिलती है SUCCESS

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मालीराम वर्मा

पौष मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है। इस एकादशी को सफला एकादशी के रूप में जाना जाता है। अपने नाम के अनुकूल इस एकादशी का व्रत करने से जीवन में सफलताएं मिलती है। व्यक्ति पाप कर्मों से मुक्त होता है।
सफला एकादशी के दिन भगवान श्री नारायण यानि विष्णु की पूजा की जाती है। सफला एकादशी का व्रत अन्य एकादशी की तरह होता है। एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके श्रीनारायण भगवान की आरती कर भोग लगाना चाहिए। भगवान की अगरबत्ती, नारियल, सुपारी, आंवला, अनार तथा लौंग आदि से आरती करनी चाहिए। संध्या को दीपदान व रात्रि जागरण का बड़ा महत्त्व है।

सफला एकादशी की कथा

प्राचीन काल में चम्पावती नामक नगर था। वहां के राजा का राजा नाम महिष्मत था। महिष्मत विद्धान, धर्मपरायण और भगवान का भक्त था। उसका सबसे छोटा पुत्र लुम्पक उसके स्वभाव से एकदम विपरीत था। वह पापी और दुष्ट स्वभाव का था। लोगों को परेशान करने में उसे मजा आता था। राजा उसकी इन आदतों से काफी परेशान था। एक दिन राजा ने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। लुम्पक भटकता हुआ जंगल पहुंचा और वहां वन्यजीवों का शिकार कर जीवन यापन करने लगा। वह रात में चम्पावती नगर में भी लूटपाट करता था।
एक बार उसे शिकार नहीं मिला। लूटपाट के लिए भी वह चम्पावती नगर नहीं पहुंच पाया। ऐसी हालात मे तीन—चार दिन बीत जाते है। तभी उसे जंगल में एक कुटिया नजर आती है और वहां पहुंचकर भोजन खोजता है पर उसे वहां कुछ नहीं मिलता। असल में वह कुटिया एक साधु की थी और साधु के उस दिन सफला एकादशी का व्रत था। इसलिए उसने भोजन नहीं बनाया। अनजाने में लुम्पक का भी एकादशी का व्रत हो जाता है। इससे भगवान को उस पर दया आ जाती है और उसे पाप मुक्त कर उसका हृदय परिवर्तन कर देत है।
तभी वहां साधु आता है और लुम्पक का आदर भाव से सत्कार करता है। उसे वस्त्रादि प्रदान करता हैं। लुम्पक सोचता है कि मनुष्य होकर पाप कर रहा है? वह साधु को सारी बात बताता है। साधु भी असली रूप में आ जाते है। दरअसल साधु के वेश में उसके पिता महिष्मत थे। वह लुम्पक के बदले हुए स्वभाव को देखकर प्रसन्न होते है और उसे राजमहल लेकर आ जाते है। वहां उसे राजकाज सौंप देते है।

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यूनेस्को भी मानता है कुंभ का महत्व

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कुंभ का महत्व यूनेस्को भी मानता है। इसलिये कुंभ को सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया है।

प्रयागराज में कुंभ का मेला 14-15 जनवरी से शुरू होगा। इसके लिए संगम नगरी में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। संगम नगरी में अखाड़ों का शाही प्रवेश भी शुरू हो गया है। सबसे बड़े श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा और श्रीपंच अग्नि अखाड़े के साधु-संत गाजे-बाजे के साथ पहुंचे। इनकी पेशवाई अखाड़े के शिविर मौज गिरि से सुबह 11 बजे गाजे बाजे के साथ शुरू हुई। पेशवाई में अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि मौजूद थे।

पेशवाई के दौरान बड़ी संख्या में अखाड़े के महंत और संत घोड़ों, हाथी और ऊंटों पर सवार होकर निकले। जयकारों से संगमनगरी गूंज उठी। नागाओं ने लाठी-डंडों के करतब दिखाए। जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थें।

हिंदुओं की धार्मिक आस्था के केंद्र कुंभ मेले का महत्व यूनेस्को भी मानता है। विश्व स्तरीय इस संस्था ने दिसंबर 2017 में कुंभ को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया था।

कुंभ मेला इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में लगता है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते है। कुंभ मेला धार्मिक उत्सव के तौर पर सहिष्णुता और समग्रता को दर्शाता है। यह खासतौर पर समकालीन दुनिया के लिए अनमोल है। कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़े धार्मिक समागम है। इसलिए ये सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है।

पांच हजार कॉटेज बन रहे


25 किमी में कुंभ मेला लगेगा, जो करीब 45 दिन तक चलेगा। कुंभनगरी में एक लाख टेंट लगाए जाएंगे। पांच सितारा सुविधाओं वाले पांच हजार कॉटेज बनाए जा रहे हैं।

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NEWS

कुंभ मेला 2019: प्रयागराज पहुंचने के लिए चुन सकते है यें विकल्प

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कुंभ मेला पर्व 2019 में जनवरी से मार्च तक प्रयागराज में आयोजित होगा। कुंभ में जाने के लिए प्लान कर रहे तो जान लें कि आप प्रयागराज कैसे पहुंच सकते है।

प्रयागराज देश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक केन्द्र है। प्रयागराज वायु, रेल एवं सड़क मार्ग से भारत के सभी बड़े शहरों से जुडा है। ऐसे में कुंभ स्नान के लिए आप रेल मार्ग, वायु मार्ग या हवाई मार्ग का विकल्प चुन सकते हैं। वहां पहुंचने पर आप स्थानीय परिवहन साधन जैसे बस, आटो, टैक्सी आदि का इस्तेमाल कर सकते है। सरकार ने इसके लिए विशेष इंतजाम करने का दावा किया है।

तीर्थराज प्रयाग शहर सड़क परिवहन हेतु राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग तंत्र से जुड़ा है। राज्य संचालित बसें सम्पूर्ण देश में कई बड़े स्थानों से उपलब्ध हैं। यूपी०एस०आर०टी०सी० (उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) से बुकिंग की जा सकती है। कई निजी ट्रेवल एजेंट्स भी बड़े शहरों से मार्गों पर निजी बसों का संचालन करते हैं।


रेलमार्ग से यूं पहुंचे प्रयाग

इसी तरह इलाहाबाद शहर रेल मार्ग से भी भारत के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। इलाहाबाद में एवं इसके चारों ओर कुंभ मेले के लिए 10 रेलवे स्टेशन सूचीबद्ध किए गए है। यहां से आप टिकट बुकिंग करा सकते है।

इलाहाबाद छिवकी (एसीओआई)

नैनी जंक्शन (एनवाईएन)

इलाहाबाद जंक्शन (एएलडी)

फाफामऊ जंक्शन (पीएफएम)

सूबेदारगंज (एस०एफ०जी०)

इलाहाबाद सिटी (एएलवाई)

दारागंज (डीआरजीजे)

झूसी (जेआई)

प्रयाग घाट (पीवाईजी)

प्रयाग जंक्शन (पीआरजी)

इसके अतिरिक्त बुकिंग आईआरसीटीसी बेवसाइट एवं रेलकुम्भ ऐप (विशेष रेल) से की जा सकती है।

वायुमार्ग से यूं पहुंचे प्रयाग

प्रयागराज एयरपोर्ट बमरौली में शहर से करीब 12 किमी दूर स्थित है। प्रयागराज से कई प्रमुख शहरों के लिए नियमित एवं शेड्यूल्ड उड़ानें उपलब्ध है।

क्रम सं०क्षेत्र बिन्दु/गमन बिन्दुसंचालकआवृत्ति
1दिल्लीएयर इंडियनदैनिक
2लखनऊजेट एयरवेजमंगल/बृह०/रवि०
3पटनाजेट एयरवेजमंगल/बृह०/रवि०
4इन्दौरजेट एयरवेजसोम०/बुध०/शनि०
5नागपुरजेट एयरवेजसोम०/बुध०/शनि०

नीचे सूचीबद्ध किये गये वायु मार्ग प्रस्तावित हैं और शीघ्र आरंभ होंगे

क्रम सं०क्षेत्र बिन्दु/गमन बिन्दुसंचालक
1पुणेइंडिगो एयरलाइन्स
2रायपुरइंडिगो एयरलाइन्स
3बंगलौरइंडिगो एयरलाइन्स
4भुवनेश्वरइंडिगो एयरलाइन्स
5भोपालइंडिगो एयरलाइन्स
6देहरादूनइंडिगो एयरलाइन्स
7मुम्बईइंडिगो एयरलाइन्स
8गोरखपुरइंडिगो एयरलाइन्स
9कोलकाताजूम एयर
10लखनऊटर्बो एवियेशन

उड़ानें निकट के शहरों वाराणसी (अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, प्रयागराज से 130 कि०मी० दूर) लखनऊ (अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, प्रयागराज से 200 कि०मी० दूर) और कानपुर (घरेलू एयरपोर्ट, प्रयागराज से 200 कि०मी० दूर) से भी बुक की जा सकेंगी।

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कुंभ मेला-2019: प्रयागराज में इन 6 तारीखों को होगा शाही स्नान

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शाही स्नान किसी भी कुंभ मेले का मुख्य आकर्षण होता है। शाही स्नान के दौरान साधु-संतों के विभिन्न अखाड़ों की ओर से शोभायात्रायें निकाली जाती है। साधु-संत अपनी परंपराओं के अनुसार गाजे-बाजे से नाचते-गाते स्नान के लिये जाते है।

कुंभ में शाही स्नान को देखने के लिए देश-विदेश से जो सैलानी पहुंचते हैं, उनकी संख्या करोड़ों में होती हैं। प्रयागराज में कुंभ मेला 14-15 जनवरी 2019 से शुरू होगा। कुंभ  मेला 4 मार्च तक चलेगा। मेले का आगाज मकर संक्रांति के दिन होता है और समापन महाशिवरात्रि पर शाही स्नान के साथ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ मेले में हर दिन पवित्र संगम पर स्नान का अपना महत्व है लेकिन, कुछ विशेष तिथियों को स्नान का फल कई गुणा बढ़ जाता है। इन विशेष तारीखों को शाही स्नान होता है। शाही स्नान को राजयोगी स्नान भी कहा जाता है।

प्रयागराज में 15 जनवरी से 4 मार्च 2019 तक कुंभ मेले में शाही स्नान की तारीख

1. मकर संक्रान्ति 15 जनवरी 2019

2. पौष पूर्णिमा 21 जनवरी, 2019

3. मौनी अमावस्या 4 फरवरी, 2019

4. बसंत पंचमी 10 फरवरी, 2019

5. माघी पूर्णिमा 19 फरवरी, 2019

6. महाशिवरात्रि 4 मार्च , 2019

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