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राजस्थान के इस किले से दुश्मन पर दागे थे चांदी के गोले

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राजस्थान के किले World Famous है। यहां के किले अपनी अनूठी स्थापत्य शैली के साथ उनसे जुड़ी रोचक कहानियों और घटनाओं के लिए भी  जाने जाते हैं। हम आपको बता रहे है चुरू के किले (Churu Fort)  की अनोखी खासियत के बारे में। एक वक्त पर इस किले की प्राचीर से दुश्मनों पर चांदी के गोले  दागे गए थें (Silver bombs were fired on enemies)।
यह कदम शौक से नहीं बल्कि मजबूरी में उठाया गया था। लोग बताते हैं कि चुरू किले (Churu Fort) का निर्माण 1739 में कराया गया था। कुछ लोग मानते है कि इसका निर्माण ठाकुर कुशल सिंह ने 1694 ईस्वी में करवाया था। ठाकुर कुशल सिंह के वंशज ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों ( British Government) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इससे अंग्रेज तिलमिला उठे। उन्होंने बीकानेर (Bikaner) से  सेना बुलाई और  किले को घेर लिया। दोनों ओर से तोपों ने जमकर गोले बरसाए।

सेठ—साहूकारों ने ​चुरू की रक्षा के लिए अपनी तिजोरियां खोल दी

एक वक्त ऐसा आ गया जब  किले में गोले खत्म हो गया। आनन—फानन में लुहारों ने मोर्चा सम्हाला।  लोहे को गलाकर गोले बनाने शुरू कर दिए लेकिन, वे भी समाप्त हो गए। और गोले बनाने के लिए सामग्री नहीं बची। तब यहां के सेठ—साहूकारों ने ​चुरू की रक्षा के लिए अपनी तिजोरियां खोल दी। उन्होंने चांदी लाकर ठाकुर के समर्पित कर दी। लुहारों और सुनारों ने मिलकर चांदी के गोले बनाए। इसमें बारूद भरा गया था। तापों ने जैसे ही चांदी के गोले उगलना शुरू किया, अंग्रेज सेना हैरान हो गई। उसने घेराबन्दी खत्म कर दी।
यह भी उल्लेख मिलता है कि ठाकुर शिवजी सिंह चुरू के शासक थे। उनका विवाद पड़ोसी रिसायत बीकानेर से अक्सर रहता था। बात अगस्त अगस्त 1814 की है किसी बात को लेकर बीकानेर और चुरू रियासत में विवाद बढ़ गया। बीकानेर के शासक सूरत सिंह ने चुरू पर चढ़ाई कर दी। ठाकुर शिवजी सिंह ने दुश्मन से जमकर लौहा लिया लेकिन, कुछ दिनों बाद इनके पास गोल और बारूद खत्म हो गए। जिससे ठाकुर शिवजी सिंह निराश हो गए। लेकिन जनता और व्यापारियों ने इन्हे आर्थिक मदद देते हुए अपने राज्य की रक्षा के लिए अपना सोना और चांदी दे दिया। जिसके बाद शिवजी सिंह ने दुश्मनो को मुँहतोड़ जबाब देते हुए चांदी के गोलों से दुश्मन पर हमला किया। जिससे दुश्मन भाग खड़े हुए।

इस संबंध में यहां लोकोक्ति भी प्रचलित है

धोर ऊपर नींमड़ी धोरे ऊपर तोप।
चांदी गोला चालतां, गोरां नाख्या टोप।।
वीको-फीको पड़त्र गयो, बण गोरां हमगीर।
चांदी गोला चालिया, चूरू री तासीर।।

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मीठी तुलसी से कमायें लाखों रुपये, सरकार देती है सब्सिड़ी

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स्टीविया यानि मीठी तुलसी की मांग बाजार में लगातार है। मीठी तुलसी कुदरती तौर पर शुगर फ्री है और यह चीनी से कई गुणा मीठी होती है। इसकी खेती करके लाखों रुपये कमा सकते है।

नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड (NMPB) स्टीविया यानी मीठी तुलसी की खेती करने पर जोर दे रहा है। सरकार इस पर सब्सिडी भी दे रही है। केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती की बजाय नकदी फसलों पर फोकस कर रही है।

स्टीविया यानी मीठी तुलसी शुगर फ्री है । इसमें चीनी से कई गुणा ज्यादा मिठास होती है। इसलिये ये चीनी का विकल्प बन रहा है। जानकारों के अनुसार, 2022 तक भारत में स्टीविया का बाजार करीब 1000 करोड़ रुपए का होगा। इसे देखते हुए ही एनएवपीबी इसकी खेती के लिए प्रेरित कर रही है। एनएमपीबी ने स्टीविया की खेती करने वाले किसानों को 20 फीसदी सब्सिडी देने की भी घोषणा की है।

मीठी तुलसी: डायबिटिज का खतरा नहीं

मीठी तुलसी की पत्तियों में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस समेत कई प्रकार के खनिज होते हैं। इस वजह से यह चीनी से अधिक मीठी होने के बाद भी नुकसानदायक नहीं है। प्राकृतिक होने के कारण इसके सेवन के बाद मोटापे और मधुमेह का डर भी नहीं है। कई दवा और सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां अपने उत्पादों में मीठी तुलसी का इस्तेमाल कर रही हैं। भारत में करीब 7 करोड़ लोग डायबिटीज से परेशान हैं।

मीठी तुलसी: कमाई का मौका

भारत में मीठी तुलसी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 800 व्यापारी मीठी तुलसी का व्यापार करते हैं। इन छोटे-बड़े व्यापारियों ने इंडियन स्टीविया एसोसिएशन की स्थापना भी की है। यह एसोसिएशन भी भारत में स्टीविया की खेती को बढ़ाने में प्रयासरत है। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टीविया 5.5 लाख से लेकर 6.5 लाख रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेची जाती है। इसके वैश्विक कारोबार में भी बढ़ोतरी हो रही है। एक एकड़ खेत से हर साल तीन से चार लाख रुपये की कमाई हो सकती है।

क्यों फायदेमंद है स्टीविया की खेती

— स्टीविया के पत्ते एक साल में चार बार यानि हर तीन माह बाद तोड़े जा सकते है।
— एक एकड़ में करीब 35 हजार पौधे लग सकते है। इसकी सिंचाई फल्ड (Flood), स्प्रिंकल (Sprinkle) और ड्रिप (Drip) तरीके से सिंचाई हो सकती है।
— एक अनुमान के अनुसार, पहले साल 10, दूसरे 15, 3 साल बाद 22, 4 साल बाद 15 और 5वें साल 10 क्विंटल सूखे पत्ते होते हैं। यह 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं।
— स्टीविया में कोई रोग नहीं लग सकता। खेती का खर्च काफी कम आता है।

सावधानी बरतें, ठगे भी जा सकते है

मीठी तुलसी के नाम पर ठगी का हाल में एक मामला सामने आया है। मामला इंदौर का है। यहां एक कारोबारी ने मीठी तुलसी के लिये एक कंपनी के साथ आनलाइन डील की। जब पार्सल पहुंचा तो उसमें मीठी तुलसी की बजाय मीठा नीम निकला। दरअसल, मीठी तुलसी की कीमत अधिक होने के कारण इसके नाम पर ठगी करने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गये है। इस लिये आॅनलाइन मीठी तुलसी यानि स्टीविया खरीदने या निवेश से पहले जांच आवश्य कर लें।

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GST लागू होने से यूं बदलेगी हमारी Life

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ashish jain

आशीष जैन

भारत एक विकासशील देश है। इसे और अधिक विकसित बनाने के लिए देश के टेक्सेशन और फाइनेंस सिस्टम में कभी-कभी बदलाव जरूरी हो जाता है। इसलिए GST जल्द ही देश में लागू होने वाला है लेकिन उससे पहले यह जानना जरूरी है कि GST क्या है, GST की जरूरत क्या है, GST से रोजमर्रा की जिन्दगी में क्या बदलाव आएगा, GST का क्या फायदा होगा। जानते हैं इस सबके बारे में…

देश के अन्दर वर्तमान में करीब 60 से भी अधिक अप्रत्यक्ष कर लागू हैं। सभी राज्यों का अपना वैट एक्ट है और केन्द्रीय सरकार का भी अपना वैट एक्ट है। इसके अलावा कई केन्द्रीय कानून जैसे कि सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और विभिन्न सेस लागू हैं। वहीं राज्य में वैट एन्ट्री टैक्स, मनोरंजन डयूटी, स्टाम्प और कई तरह के टैक्स लागू है। इस तरह से कोई भी एक टैक्स पूरे देश में लागू नहीं होने के कारण टैक्स के फायदे सभी नहीं ले पाते हैं और इसी कारण आम आदमी को टैक्स के ऊपर टैक्स देना होता है, जिसे केसकेडिंग इफेक्ट भी कहा जाता है। इसके परिणाम से इन्फ्लेशन रेट ज्यादा हो जाती है जिसका नुकसान आम आदमी को भुगतना पड़ता है। इन्हीं सभी परेशानियों को खत्म करने के लिए जीएसटी की जरूरत देश में पड़ी। जीएसटी का मतलब एक टैक्स एक देश नियम का लागू होना है। इसके फलस्वरूप पूरा देश किसी भी तरह के व्यापार के लिए एक मार्केट बन जाएगा। जीएसटी सभी तरह के वस्तु और सेवाओं पर लागू होगा, क्योंकि एक टैक्स एक देश नियम लागू होगा, जिससे आम आदमी को टैक्स में बहुत फायदा होगा।

जीएसटी के फायदे

देश की टैक्सेशन फील्ड की अग्रणी कम्पनी सेग इंफोटेक के प्रबंध निदेशक सीए अमित गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में दुनिया में 100 से अधिक देश हैं, जहां जीएसटी पहले से ही लागू है और इन देशों के लिए उन्हीं देशों से व्यापार करना फायदेमंद और सुविधाजनक होता है, जहां जीएसटी लागू है। वाणिज्य के एक्सपर्ट्स की मानें तो जीएसटी के लागू होने के बाद देश की जीडीपी बढ़ेगी और प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ेगी। जीएसटी टैक्स के सिस्टम को सरल कर देगा, जिससे स्टार्टअप्स को व्यापार में अपने कदम जमाने का आसान तरीका मिलेगा। इन सभी फायदों के फलस्वरूप देश में नौकरियां भी बढ़ेंगी। जीएसटी सिस्टम में रजिस्टर सप्लाई चेन सिस्टम जिसके द्वारा ज्यादातर काम ऑनलाइन ही किया जा सकेगा। इसके फलस्वरूप कम से कम मेनुअल काम होगा और गलतियां होने की संभावना भी बहुत कम रह जाएगी। इस प्रक्रिया से भष्टाचार और कालेधन की समस्या हमारे देश से दूर हो जाएगी।

जीएसटी की मौजूदा स्थिति 

जीएसटी की मौजूदा स्थिति

GST – Present and Future

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संसद के दोनों ही सदनों ने जीएसटी बिल को मंजूरी दे दी है और अब जीएसटी समिति जीएसटी रेट, टैक्सेज, और बाकी कम्पनशेसन बिल और अन्य बातों पर अन्तिम निर्णय ले रही है। इनके फाइनल होने के बाद जीएसटी बिल को दोनो सदनों में वापिस पेश किया जाएगा। यहां से पारित होने के बाद यह बिल देश के राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया जाएगा ओर उनके हस्ताक्षर के बाद यह जीएसटी बिल जीएसटी कानून बन जाएगा। सरकार जीएसटी को 1 जुलाई 2017 से लागू करने की तैयारियां कर रही है। इसी के चलते सरकार ने सुझावों के लिए जीएसटी ड्राफ्ट, कुछ रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, चालान फॉम्स जारी किए हैं।

जीएसटी की प्रक्रिया

जीएसटी में 3 मासिक रिटर्न उपलब्ध होगी –
प्रत्येक 10 तारीख को – सेल्स रजिस्टर उपलब्ध होगी।
प्रत्येक 15 तारीख को – परचेज रजिस्टर उपलब्ध होगी।
प्रत्येक 20 तारीख को – फाइनल मासिक रिटर्न उपलब्ध होगी।

 जीएसटी में सेल्स एण्ड परचेज रिटर्न को रोज उपलब्ध करने की सुविधा दी गई है और इसी से आखिरी तारीख का दबाव खत्म किया जा सकता है। गवर्नमेंट की वेबसाइट का लोड कम करने के लिए जीएसटीएन विभाग जीएसपी (जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर) ओर एएसपी (एसोसिएट सुविधा प्रावाइडर) की मदद से इस सिस्टम को मैनेज करेगा।

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