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राजस्थान में BJP के लिए भारी रहे तीन महीने, खो दिए पांच नेता

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राजस्थान में भाजपा के लिए पिछले तीन महीने अच्छे नहीं रहे। इन तीन महीनों में दो सांसद, एक विधायक और दो वरिष्ठ नेता भाजपा ने खो दिए।

आज बीसूका के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ.दिगंबर सिंह का निधन हो गया। कैंसर की बीमारी और कथित स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से आज ​सुबह दिगंबर सिंह का जयपुर में निधन हो गया। यह राजस्थान में भाजपा के लिए बड़ी क्षति है।

पूर्व मंत्री डॉ.दिगंबर सिंह भरतपुर-धौलपुर की जाट राजनीति में पैठ रखते थें। धौलपुर के जाटों के आरक्षण के मामले में चल रहे आंदोलन को कंट्रोल करने में भी डॉ. सिंह का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उनकी इन जिलों में स्थानीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी।

आज शाम उनका भरतपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर संवदेना जताई।

इन नेताओं को भाजपा ने खो दिया

भाजपा को इससे पहले 9 अगस्त 2017 को अजमेर से सांसद प्रो. सांवरलाल जाट के निधन के कारण झटका लगा था। उनका निधन मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था। जयपुर में आयोजित भाजपा की एक बड़ी बैठक के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। प्रो. सांवरलाल जाट किसान और जाटों में प्रभाव रखते थे।

इसी तरह 17 सितम्बर 2017 को अलवर से सांसद महंत चांदनाथ का भी निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार रहने के कारण चांदनाथ अपने चुनावी क्षेत्र में सक्रिय नहीं रह पाए। जिसके कारण अलवर में भाजपा की पैठ कमजोर हुई। महंत चांदनाथ की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती थी।

इन तीन महीनों में भाजपा ने एक विधायक भी खोया। भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी का 28 अगस्त 2017 को स्वाइन फ्लू के कारण निधन हो गया था। वह बिजौलिया पूर्व राजघराने की पूर्व राजकुमारी थी और राजपरिवार से होने के कारण क्षेत्र में उनकी स्थानीय राजनीति में अच्छी पैठ थी। इसी तरह वरिष्ठ भाजपा नेता शंभुदयाल बड़गुजर का निधन भी पिछले दिनों हो गया। वे राजस्थान खादी बोर्ड के अध्यक्ष थे।

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विधानसभा चुनाव : फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, यूट्यूब पर POST करने से पहले जान लें ये

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विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बाद जिला कलेक्टरों ने भी अपने-अपने इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इस दौरान कई तरह की पाबंदी रहेगी।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 7 दिसंबर को होंगे और रिजल्ट 11 दिसंबर को आएगा। इसकी घोषणा के बाद कलेक्टरों ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नजर सोशल मीडिया पर रहेगी। वायरल पोस्ट पर खास नजर रखने के निर्देश है। इसके लिए टीमें भी बनाई गई है। कलक्टरों ने निषेधाज्ञा के जो आदेश जारी किए हैं उनमें विधानसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर खास नजर पर जोर दिया गया है।

आदेशों के अनुसार कोई भी व्यक्ति या संस्था इन्टरनेट तथा सोशल मीडिया जैसे— फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, यूट्यूब, आदि के माध्यम से किसी प्रकार का धार्मिक उन्माद, जातिगत द्वेष या दुष्प्रचार नही करेगा।

निषेधज्ञा लागू, इन का रखें ध्यान

कोई भी व्यक्ति किसी के समर्थन या विरोध में सार्वजनिक एवं राजकीय सम्पतियों पर किसी तरह का नारा-लेखन या प्रति-चित्रण नहीं करेगा, ना ही करवाएगा। और न ही किसी तरह के पोस्टर, होर्डिंग आदि लगाएगा। और न ही सार्वजनिक सम्पतियों का विरूपण करेगा या करवायेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी भी निजी सम्पति पर विज्ञापन करता है तो उसके लिए भवन स्वामी की लिखित पूर्वानुमति जरुरी होगी।

कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का विस्फोटक पदार्थ, रासायनिक पदार्थ, आग्नेय अस्त्र-शस्त्र, जैसे- रिवाल्वर, पिस्टल, बंदूक, एम.एल गन, बी.एल. गन, आदि एवं अन्य हथियार जैसे गण्डासा, फर्सी, तलवार, भाला, कृपाण, चाकू, छुरी, बर्छी, गुप्ती, कटार, धारिया, बाघनख (शेर-पंजा) जो किसी धातु के शस्त्र के रूप में बना हो आदि तथा विधि द्वारा प्रतिबन्धित हथियार और मोटे घातक हथियार-लाठी आदि सार्वजनिक स्थानों पर धारण कर न तो घूमेगा, और न ही प्रदर्शन करेगा और न ही साथ में लेकर चलेगा।

आदेश ड्यूटी पर तैनात सीमा सुरक्षा बल, राजस्थान सशस्त्र पुलिस बल, राजस्थान सिविल पुलिस, चुनाव ड्यूटी में तैनात अद्र्धसैनिक बल, होमगार्ड एवं चुनाव ड्युटी में मतदान दलों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।

यह प्रतिबंध बारात एवं शवयात्रा पर लागू नहीं होगा

उपखण्ड मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के बिना किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कोई भी जुलूस, सभा, धरना, भाषण आदि का आयोजन नहीं करेगा एवं न ही संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना ध्वनि प्रसारण यंत्र का प्रयोग किया जावेगा। ध्वनि प्रसारण यंत्र के लिए अनुमति संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट द्वारा प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक दी जा सकेगी। यह प्रतिबंध बारात एवं शवयात्रा पर लागू नहीं होगा।

कोई भी व्यक्ति सांप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाने वाले तथा उत्तेजनात्मक नारे नहीं लगाएगा। न ही ऐसा कोई भाषण और उद्बोधन देगा, न ही ऎसे किसी पम्पलेट, पोस्टर या अन्य प्रकार की चुनाव सामग्री छापेगा या छपवाएगा, वितरण करेगा या करवाएगा और न ही किसी एम्प्लीफायर, रेडियो, टेपरिकार्डर, लाउडस्पीकर,, ऑडियो-वीडियो कैसेट या अन्य किसी इलैक्ट्रानिक उपकरणों के माध्यम से इस प्रकार का प्रचार-प्रसार करेगा अथवा करवाएगा, और न ही ऎसे कृत्यों के लिए किसी को दुष्प्रेरित करेगा।

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विधानसभा चुनाव : सरकारी कर्मचारी-अधिकारी रखे ये ध्यान, नही तो पड़ेगा भारी

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Election Commission of India's Model Code of Conduct 1

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता की पालना करवाने के लिए विशेष निगरानी दलों का गठन किया गया है। ये दल मतदाताओं को लुभाने वाली गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखेंगे।

राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों पर सात दिसंबर को चुनाव होंगे। इसकी घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार के अनुसार, आचार संहिता की पालना के लिए 614 टीमों का गठन किया गया है। इनमें आयकर, आबकारी, नारकोटिक्स और वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए निर्देश

उधर, जयपुर में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता के प्रभावी होने के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत् राजकीय अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रावधानों का शक्ति से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

महाजन ने बताया की कोई राजकीय कर्मचारी ना तो किसी प्रकार की राजनैतिक गतिविधियों जैसे रैली,सभा या चुनाव प्रचार में भाग ले सकेगा और ना ही किसी उम्मीदवार, पार्टी के चुनाव, मतदान गणना अभिकर्ता के रूप में कार्य कर सकेगा। उन्होंने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने कार्यालय एवं विभाग में उक्त निर्देशों की पालना करने को पाबन्द किया है।

हथियार है तो करा दें तुरंत जमा

जिन लोगों के पास लाइसेंस शुदा हथियार है, उन्हें संबंधित थानों में जमा कराने होंगे। यह आदेश नेशनल राइफल एशोसियेशन के सदस्य जो प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, कानून व्यवस्था से जुड़े राज्य सरकार के अधिकारी-कर्मचारी तथा शस्त्र अनुज्ञापत्रधारी सुरक्षाकर्मी (बैंक, जीवन बीमा निगम इत्यादि) पर लागू नहीं होगा।

शस्त्र अनुज्ञापत्रधारी चुनाव परिणाम घोषित होने के सात दिवस बाद अपना शस्त्र संबंधित थाने से प्राप्त कर सकेंगे। शस्त्र जमा नहीं कराने की स्थिति में शस्त्र अनुज्ञापत्रधारी के विरूद्ध धारा 188 भारतीय दंड संहिता एवं आम्र्स एक्ट 1959 के अन्तर्गत कार्यवाही हो सकती है।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित थानाधिकारी को निर्देश दिये हैं कि यदि किसी अनुज्ञाधारी को वास्तव में अपनी जान माल का खतरा है तथा वह शस्त्र जमा कराने की छूट चाहता है तो उस अनुज्ञाधारी द्वारा व्यक्त कारणों की गहनता से जांच कर अपनी स्पष्ट अनुशंषा के साथ प्रकरण स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखें।

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PM की सभा के कारण बदला चुनाव कार्यक्रम घोषणा का टाइम, कांग्रेस का गंभीर आरोप

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निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा की। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अजमेर में सभा थी। आयोग की प्रेस कांफ्रेस और मोदी की सभा का समय एक था।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया है। गहलोत ने कहा है कि चुनाव आयोग ने पीएम नरेंद्र मोदी की अजमेर में सभा को देखते हुए विधानसभा चुनाव की घोषणा देरी से की है।

भारतीय निर्वाचन आयोग ने शनिवार को नई दिल्ली में अपराह्न तीन बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजस्थान समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की। कांग्रेस के संगठन महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्विट किया है कि 5 अक्टूबर को चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती थी लेकिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अजमेर में सभा को देखते हुए इसे बदला गया।

गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी की सभा को देखते हुए पहले तारीख को 6 अक्टूबर किया गया। इसके बाद चुनाव आयोग ने सभा के समय को देखते हुए 12:30 बजे आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी समय बदलकर 3 बजे कर दिया। गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री मोदी की कितनी सहूलियत देखेगा?

गहलोत ने कहा कि हिमाचल-गुजरात के चुनावों में भी चुनाव आयोग की भूमिका ऐसी ही रही थी।  पिछली बार भी चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए तो डेट डिक्लियर कर दी गई थी। गुजरात के चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई। आयोग ने ऐसा इसलिए किया था ताकि पीएम मोदी को गुजरात में घोषणाओं के लिए टाइम मिल जाए।

 

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी एक ट्वीट करते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि आयोग पहले 12.30 कांफ्रेंस करने वाला था. अजमेर में पीएम नरेंद्र मोदी की दोपहर 1 बजे होने वाली रैली के चलते कांफ्रेंस का समय बढ़ाकर अपराह्न 3 बजे कर दिया गया है।

आयो​ग ने कहा ये

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने पीसी के समय में बदलाव के लिए माफी मांगते हुए कहा कि पत्रकारों और पोल अधिकारियों ने दोपहर 12.30 बजे पीसी में शामिल होने से असमर्थता जताई थी। जिसके चलते आयोग को पीसी के समय में बदलाव करना पड़ा।

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